Man Ka Panchhi By Smita Darshetkar (मन का पंछी - स्मिता दारशेतकर )
Man Ka Panchhi By Smita Darshetkar (मन का पंछी - स्मिता दारशेतकर )
Couldn't load pickup availability
हिंदी सूजनोत्सव 2022 में अपना काव्य संग्रह प्रकाशित करना है और इस नए काव्य संग्रह की प्रस्तावना आप ही को लिखनी होगी।' स्मिता ने बड़े स्नेह और आग्रह से मुझसे कहा था। सृजनोत्सव के चलते ही एक सुंदर अनुबंध बना था स्मिता से। खुशी थी कि जिन विद्यार्थियों के लिए और जिस कविता के लिए IMB के सृजनोत्सव में स्मिता ढेर सा स्नेह और अपनत्व लेकर आती थी, आज उन्हीं विद्यार्थियों की साक्ष्य में उनके काव्यसंग्रह का लोकार्पण होगा। इसीलिए स्मिता की यह कल्पना मुझे हृद्य लगी थी। विगत सात-आठ वर्षों से एक समयचेतस संवेदनशील कवयित्री के रूप में, में स्मिता को जानने लगी थी। कभी कवि सम्मेलनों में तो कभी सोशल मीडिया पर उन्हें काफी बार सुन चुकी थी। एक सहज सौंदर्यानुभूति की सहज अभिव्यक्ति उनकी कविता की ख़ासियत है। अक्सर उनकी कविताओं में चिन्हित मानवीय सरोकार मुझे आकर्षित करता रहा, और अब 100 कविताओं का संकलन मेरे हाथ में। शीर्षक है- 'मन का पंछी'।
ये कविताएं एकदम एक सीटिंग में पढ़ी जानेवाली हल्की-फुल्की कविताएं नहीं हैं, न ही मन को रंजित करनेवाली इश्क मोहब्बत की कविताएं हैं। समय और समाज प्रतिबद्ध संवेदना शुरू से आखिर तक इन कविताओं में गहराती गई है।
खुशी है कि 'मन का पंछी' अब पाठकों के हाथ में होगा। इस पंछी ने जीवन जगत के विस्तृत आसमां में अपनी सोच, अपने विचारों को मुक्त करते हुए शब्दपंखी उड़ान भर दी है। अपने आसपास घटित होनेवाली अनेक घटनाएं कवयित्री को बेचैन करती है और वही बेचैनी जब शब्दबद्ध होती है, तो अपने पाठकों को अस्वस्थ करने की क्षमता भी रखती है। काव्यसंग्रह के अनुक्रमित शीर्षकों मात्र से गुजरने पर ज्ञात होता है कि कवयित्री का अनुभव क्षेत्र काफी व्यापक है।
पन्ने 140
Share
